सामर्थ्य गौरव वीरता
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भा रतीय संस्कृति सबसे श्रेष्ठ एवम् प्राचीनतम् रही है। इतिहास साक्षी है कि भारत के मूल हिन्दू समाज ने कभी किसी पर आक्रमण नहीं किया। हिन्दू पूरे विश्व के साथ आत्मीय सम्बन्ध मानता रहा है, इसलिए पर्यावरण, विश्वशांति तथा बन्धुत्व की कुंजी हिन्दू समाज के पास रही है। हमारी मान्यता रही है कि तलवार के बल पर नहीं बन्धुत्व के बल पर लोगों को जीतो इसलिए हम सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामया।। के मार्ग पर चले। 10 हजार साल के कालखण्ड को उठायेंगे तो दुनिया के अन्दर हिन्दू जहां भी गये, सेना लेकर नहीं गीता, वेद, उपनिषद लेकर गये। परन्तु गुलामी के लम्बे कालखण्ड के कारण हमारे ही लोगों के मनों पर इस काल की छाप अंकित हो गई और वे मार्ग भटक गये। आज भारत में तीन ऐसी पीढ़ी तैयार हो गई है जो अपने आदर्शो, मान बन्दुओं तथा महापुरूशों को भुलाती जा रही है। इसके कारण कुसंस्कार, धर्मान्तरण, पाश्चात्य शेली का प्रभार हमारी वर्तमान पीढ़ी पर पड़ रहा है। अर्थात वर्तमान में जितनी भी समस्यायें है उनके मूल में हिन्दू समाज में जागरण का अभाव ही मुख्य है।

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मंत्र

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हिंदू जागरण मंच प्रचंड हो, भारत देश अखंड हो।

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